Viscera Report

Viscera Report
विसरा रिपोर्ट:- जब किसी व्यक्ति जीव, प्राणी जीव की किन्ही अज्ञात कारणों से मृत्यु हो जाती हैं, ऐसे में  यदि पुलिस वालो या  परिवार वालों को व्यक्ति की  मृत्यु  पर शक होता है इस शक को दूर करने के लिए उस शव (डेड बॉडी) का पोस्टमार्टम करवाया जाता और पोस्टमार्टम के दौरान व्यक्ति के शरीर के अंदरूनी भाग जैसे कि आंत,फेफड़े, लीवर, किडनी तथा हड्डियो  जैसे मुख्य अंगो का सेम्पल लिया जाता है और इन सैंपल को  "फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी " मे जाँच के लिये भेजा जाता है। वहाँ शरीर के इन अंगों का गहनता से परीक्षण किया जाता है, इस तरह के परीक्षण को करके व्यक्ति की मृत्यु के अज्ञात कारणों का पता बयान करने को ही  "विसेरा रिपोर्ट" कहा जाता हैं।  इस तरह यह जांच में स्पष्ट होता है कि व्यक्ति की मृत्यु किस कारण से हुई इन कारणों का पता लगाना ही "विसरा रिपोर्ट" कहलाती हैं।
 
विसरा रिपोर्ट क्यो की जाती है :- जब किसी प्राणी की मृत्यु हो जाती हैं शव को देखकर लगता है कि शव नीला रंग का हो गया है या मुंह से झाग निकला हुआ या शरीर पर किसी तरह के निशान हो , गले पर अंगुलियों के  निशान हो, किसी जहरीले जीव के काटने के संकेत हो, ऐसे ही अन्य और कई अज्ञात कारणों को स्पष्ट करने के लिये व्यक्ति के शव की विसरा जांच की जाती है ।
 
विसरा की जांच कब की जाती हैं:- 
जब किसी व्यक्ति के बीमार नहीं होने पर भी अचानक मृत्यु हो जाती हैं और उसके शव (dead body)को देखने पर हत्या (murder) जैसी आशंकाएं प्रतीत होती हैं तो ऐसे में पुलिस वालो या परिवार वालो के कहने पर शव की विसरा जांच करना जरूरी हो जाता है। अन्यथा व्यक्ति की मौत जहर खाने से, रेप हो जाने से, पानी में डूब जाने से, करंट लगने पर इत्यादि मौके से भी हो जाती हैं तो मौत का सही समय और सही कारण पता करने के लिए भी यह जांच करवाई जाती हैं।
 
विसरा रिपोर्ट कैसे की जाती हैं:- 
जब किसी भी अपराध के कारणों का सही पता नहीं चल पाता है तो ऐसे में पुलिस वालो को विसरा जांच की सहायता लेनी पड़ती हैं ये जांच गहन तरीके से की जाती हैं जैसे किसी भी व्यक्ति के कारणों को जानने में कई बार उलजने जैसे सवाल खड़े हो जाते ऐसे में मृतक के शव का पोस्टमार्टम कराया जाता है और पोस्टमार्टम में कुछ सवाल अनसुलझे रहस्य रह जाते है ऐसे में मृतक के शव (dead body) के कुछ विसराल पार्ट्स जैसे फेफड़े, आंत, लिवर, किडनी जैसे अन्य मुख्यांगो का स्पेशियलिस्ट वैज्ञानिकों द्वारा सैंपल लिया जाता है और उन सैंपल्स को सेचुराइज करके बंद डिब्बों में ही "फोरेंसिक साइंस  लेबोरेटरी (FSL)" तक पहुंचाया जाता है जो कि हॉस्पिटल के टॉक्सिकोलॉजी  डिपार्टमेंट ही सैंपल कलेक्ट करते हैं और वो FSL तक पहुंचाते है और विसरा जांच की रिपोर्ट तैयार करते हैं। विसरा रिपोर्ट को स्पष्ट होने में कम से कम एक से डेढ़ महीने का समय लग जाता है पर हमारे देश भारत में इस रिपोर्ट को आने में और अधिक समय भी लग जाता हैं।
 
क्यों महत्वूर्ण हैं विसरा रिपोर्ट:- 
सच में देखा जाये तो गहनता से किसी मृतक की जांच का अहम हिस्सा होता है। विसरा रिपोर्ट से व्यक्ति की हत्या या मौत का सही समय और अन्य कई कारणों का पता चलता है। माना जाता हैं कि विसरा रिपोर्ट से ही हमें व्यक्ति के मौत सही समय, उसकी मृत्यु कुछ खाने से या गला दबाने से या अन्य कई मुख्य कारणों का स्पष्टीकरण  हो सकता है, कई बार व्यक्ति की मौत की गुत्थी पुलिस से भी नहीं सुलझ पाती हैं और न्याय के मामले में अटकल लग जाती हैं ऐसे में भी न्यायलय के द्वारा भी इस जांच को करवाना महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में न्यायालय भी विसरा रिपोर्ट पर ही सही न्याय पर आधारित रहती है।


 


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